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स्वामित्व योजना बनी सिरदर्द! सर्वे की गलतियां सुधारवाने दर-दर भटक रहे रहवासी

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Published On: September 26, 2026

स्वामित्त योजना बनी लोगो सरदार सर्वे की गलतियां सुधारवाने दर दर भटक रहे रहवासी

कहीं घर दर्ज नहीं हुए तो कहीं दूसरे के नाम चढ़ी संपत्ति, वर्षों से काबिज लोगों ने दस्तावेजों के साथ सुधार की उठाई मांग

केसली: प्रदीप पांडे

ग्रामीण आबादी क्षेत्र में वर्षों से निवासरत लोगों को उनकी संपत्ति का अधिकार दिलाने के उद्देश्य से लागू स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन को लेकर केसली क्षेत्र में कुछ रहवासी सर्वे की विसंगतियों से परेशान होने का दावा कर रहे हैं। रहवासियों का कहना है कि ड्रोन सर्वे और रिकॉर्ड तैयार करने के दौरान हुई कथित गलतियों के कारण कई लोगों के मकान दर्ज नहीं हो सके, जबकि कुछ मामलों में संपत्ति दूसरे लोगों के नाम दर्ज होने की स्थिति सामने आई है।

केसली ब्लॉक में स्वामित्व योजना से जुड़ी समस्याओं को लेकर कुछ लोगों ने सीएम हेल्पलाइन सहित राजस्व विभाग में आवेदन देकर रिकॉर्ड में सुधार एवं छूटे हुए पात्र लोगों को योजना का लाभ दिलाने की मांग की है। योजना का उद्देश्य ग्रामीण आबादी में निवासरत लोगों को उनकी संपत्ति का कानूनी अधिकार उपलब्ध कराना है।

कलेक्टर के आदेश का हवाला

रहवासियों ने 22 मई 2026 को जारी कलेक्टर के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि केसली में एक व्यावसायिक स्थान को स्वामित्व योजना में शामिल किए जाने का मामला सामने आया था। उनके अनुसार आदेश में संबंधित स्थान को योजना से पृथक करने तथा उस समय पदस्थ पटवारी और राजस्व निरीक्षक के संबंध में कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।

हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक वेब स्रोतों में इस विशिष्ट 22 मई 2026 के केसली आदेश की प्रति स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सकी है। इसलिए आदेश में दर्ज कार्रवाई और उसके कारणों की पुष्टि संबंधित मूल आदेश की प्रति से किया जाना आवश्यक है।

40 साल से काबिज होने का दावा, फिर भी योजना से बाहर

कुछ रहवासियों का कहना है कि वे दशकों से संबंधित मकानों में निवासरत हैं, ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में उनका उल्लेख है तथा कुछ के पास पुराने पट्टे एवं अन्य दस्तावेज भी मौजूद हैं। इसके बावजूद उनका नाम स्वामित्व योजना के रिकॉर्ड में नहीं आने से वे अपने अधिकार के लिए राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।

रहवासियों की मांग है कि केसली एवं आसपास के क्षेत्रों में जिन पात्र लोगों के नाम सर्वे के दौरान छूट गए हैं, उनका पुनः सत्यापन कराया जाए। साथ ही जिन संपत्तियों के रिकॉर्ड में नाम या स्वामित्व को लेकर विसंगति है, उनका निराकरण करने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाए।

तहसील कार्यालय में आवेदन नहीं लिए जाने का आरोप

कुछ हितग्राहियों ने आरोप लगाया कि जब वे स्वामित्व योजना से संबंधित शिकायत लेकर तहसील कार्यालय पहुंचे तो उन्हें जिला कलेक्टर कार्यालय में आवेदन देने की बात कहकर वापस कर दिया गया। उनका कहना है कि पूर्व में दिए गए कुछ आवेदन भी पटवारी प्रतिवेदन प्राप्त होने के बावजूद वापस कर दिए गए।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सागर जिले में स्वामित्व योजना के अंतर्गत अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं निःशुल्क पंजीयन की प्रक्रिया चल रही है।

जनसुनवाई में एसडीएम ने दिए आवेदन लेने के निर्देश

रहवासियों के अनुसार, मंगलवार को जनसुनवाई में उन्होंने एसडीएम राजनांदनी शर्मा के समक्ष अपनी समस्या रखी। उनके मुताबिक एसडीएम ने संबंधित आवेदनों को जिला स्तर पर भेजने की बात कहते हुए तहसीलदार को आवेदन प्राप्त करने के निर्देश दिए।

नाम गलत हुआ तो भविष्य में विवाद की आशंका

रहवासियों का कहना है कि यदि ड्रोन सर्वे अथवा रिकॉर्ड में किसी मकान के वास्तविक कब्जाधारी के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज हो गया है और उसी आधार पर आगे पंजीयन की प्रक्रिया होती है, तो भविष्य में स्वामित्व को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है।

लोगों ने मांग की है कि स्वामित्व योजना से छूटे पात्र लोगों और रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियों की दोबारा जांच कराई जाए। जिन मामलों में कोई विवाद नहीं है, वहां प्रक्रिया जारी रखते हुए विवादित मामलों का पहले निराकरण किया जाए, ताकि पात्र लोगों को उनके अधिकार से वंचित न होना पड़े।

सागर जिले में स्वामित्व योजना के लिए प्रशासन द्वारा कैंप और पंजीयन अभियान चलाया जा रहा है तथा अधिकारियों को पात्र हितग्राहियों तक योजना का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।