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कपट और छल से होता है पतन, सरलता से खुलता है आत्मिक उन्नति का मार्ग: आर्यिका वैराग्यमती जी

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Published On: September 18, 2026

दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की व्याख्या, बालिका मंडल ने किया तत्वार्थ सूत्र का वाचन

गौरझामर: गिरीश शर्मा

धर्मनगरी गौरझामर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की परंपरा की परम प्रभावक शिष्या पूज्य आर्यिका श्री वैराग्यमती जी ससंघ चार आर्यिकाओं का पावन वर्षायोग श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच चल रहा है। दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन श्रद्धालुओं को उत्तम आर्जव धर्म का संदेश देते हुए आर्यिका श्री वैराग्यमती जी ने जीवन में सरलता और निष्कपटता अपनाने का आह्वान किया।

आर्यिका श्री ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में सरलता लानी चाहिए। जीवन में दिखावे और मायाचारी की आवश्यकता नहीं है। कपट और छल व्यक्ति के पतन का कारण बनते हैं, जबकि सरल एवं निष्कपट जीवन आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने धर्म के माध्यम से मनुष्य को अपने भीतर झांकने और आचरण को शुद्ध करने की प्रेरणा दी।

उन्होंने कहा कि उत्तम आर्जव धर्म केवल प्रवचन सुनने का विषय नहीं, बल्कि उसे जीवन के व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है। मन, वचन और कर्म में एकरूपता रखते हुए छल-कपट से दूर रहना ही सरलता की वास्तविक पहचान है।

इस अवसर पर पंडित श्री राजेंद्र जी ने कहा कि गौरझामर नगरवासियों के लिए आर्यिका श्री वैराग्यमती जी के रूप में आचार्य श्री का आशीर्वाद प्राप्त होना सौभाग्य की बात है। उनका ससंघ वर्षायोग समाज के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है।

चातुर्मास संयोजक दीपक चौधरी ने कहा कि आचार्य श्री समयसागर जी महाराज का गौरझामर समाज पर परम उपकार और अनुपम आशीर्वाद है। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री ने समाज को वैराग्यमयी, प्रशम, सहज एवं धवल रत्न रूपी आर्यिकाएं प्रदान की हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आर्यिका श्री के दर्शन एवं प्रवचन का लाभ लेकर धर्मलाभ अर्जित करने का आग्रह किया।

बालिका मंडल ने किया तत्वार्थ सूत्र का वाचन

दशलक्षण महापर्व के अवसर पर सकल दिगंबर जैन समाज, कमेटी, गौशाला कमेटी, महिला मंडल, पाठशाला परिवार, बालिका सोशल ग्रुप, विद्यासागर नवयुवक मंडल, महावीर जिनालय परिवार, आदिनाथ जिनालय परिवार एवं नेमिनाथ कलश जिनालय परिवार सहित समाज के श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से आचार्य श्री की पूजन की।

वहीं बालिका मंडल की बहनों ने आर्यिका श्री के समक्ष तत्वार्थ सूत्र जी का वाचन किया। इस दौरान अर्घ एवं श्रीफल समर्पित कर श्रद्धा व्यक्त की गई। धार्मिक आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे और प्रवचन एवं धार्मिक कार्यक्रमों का लाभ लेकर धर्मलाभ अर्जित किया।