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सागर की धरती से फिल्मी दुनिया तक पहुंची सुनील की आवाज, मंत्री राजपूत ने भेंट की पल्सर बाइक

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Published On: September 4, 2026

सागर। कभी मंचों और स्थानीय आयोजनों में अपने सुरों से लोगों का दिल जीतने वाले सुरखी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम आगरा निवासी सुनील लोधी की आवाज अब फिल्मी दुनिया में भी अपनी पहचान बना रही है। फिल्म ‘हनुमान अंश’ में उनके स्वर में गाया गया भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई’ इन दिनों लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है।

भक्ति भाव से सराबोर सुनील की आवाज को श्रोताओं की सराहना मिल रही है। उनकी इस उपलब्धि से सुरखी क्षेत्र में भी खुशी और गर्व का माहौल है।

हुनर की सराहना, मुलाकात में मिली नई पहचान

सुनील लोधी की प्रतिभा से प्रभावित होकर मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने उनसे मुलाकात की और फिल्म में उनके भजन के लिए शुभकामनाएं दीं। मुलाकात के दौरान मंत्री ने सुनील से आत्मीयता से उनकी इच्छा पूछी।

सुनील ने बाइक लेने की इच्छा जताई। इसके बाद मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने उनकी इच्छा पूरी करते हुए उन्हें नई पल्सर बाइक उपहार स्वरूप भेंट की।

कमजोर नजरों को हौसले ने दी मात

सुनील लोधी जन्म से ही नेत्र संबंधी कमजोरी का सामना कर रहे हैं, लेकिन उनकी प्रतिभा और मेहनत के आगे यह चुनौती कभी दीवार नहीं बन सकी। संगीत के प्रति लगन और लगातार प्रयासों के दम पर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने सुनील की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी कला के माध्यम से पूरे सुरखी विधानसभा क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। फिल्म में उनका भजन लोकप्रिय होना क्षेत्र के लिए भी गर्व की बात है। उन्होंने सुनील के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

आकाश सिंह राजपूत ने भी दिया मंच

सुनील की इस यात्रा में प्रोत्साहन की भी अहम भूमिका रही है। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के पुत्र एवं युवा नेता आकाश सिंह राजपूत ने सुनील की प्रतिभा को आगे लाने के लिए उन्हें विभिन्न कार्यक्रमों में मंच उपलब्ध कराया।

स्थानीय आयोजनों में सुनील के गीतों और भजनों की प्रस्तुतियां कराकर उनकी प्रतिभा को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। इसी तरह लगातार मिले मंच और प्रोत्साहन ने सुनील के आत्मविश्वास को मजबूत किया।

ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देने पर जोर

मंत्री गोविंद सिंह राजपूत लंबे समय से सुरखी क्षेत्र के युवाओं को खेल, कला और रचनात्मक क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते रहे हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण अंचलों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत सिर्फ उन्हें सही मंच और उचित प्रोत्साहन देने की है।

सुनील लोधी की कहानी भी इसी हौसले की मिसाल है—चुनौतियां अपनी जगह रहीं, लेकिन सुरों का सफर जारी रहा और उनकी आवाज अब फिल्मी दुनिया तक पहुंच गई।