शिक्षक दिवस पर ज्ञान, संस्कार और गुरु-शिष्य परंपरा का दिखा संगम, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
देवरी।
“एक शिक्षक सिर्फ पाठ नहीं पढ़ाता, वह पूरी पीढ़ी का भविष्य गढ़ता है।” इसी विचार और गुरुजनों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता की भावना के साथ पंडित बृजकिशोर पटेरिया शिक्षा महाविद्यालय (बीकेपी कॉलेज), देवरी में शिक्षक दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गुरु-शिष्य परंपरा, शिक्षा के महत्व और शिक्षक की भूमिका को केंद्र में रखते हुए विभिन्न सांस्कृतिक एवं रचनात्मक प्रस्तुतियां दी गईं।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के यशस्वी संचालक डॉ. अवनीश मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षक केवल विषय का ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य को दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षकों के प्रति सम्मान बनाए रखने और उनके बताए मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
गुरु-शिष्य परंपरा को बताया भारतीय संस्कृति की धरोहर
महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य श्रीमती प्रतिभा पांडेय ने विद्यार्थियों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर है। विद्यार्थियों में अनुशासन, संस्कार, जिज्ञासा और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति ही शिक्षक के प्रयासों की वास्तविक सफलता है।
18 वर्षों से शिक्षक सम्मान की परंपरा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के व्याख्याता शिवम शर्मा ने बीकेपी शिक्षा महाविद्यालय और शिक्षक दिवस के बीच वर्षों से चले आ रहे आत्मीय संबंध को याद किया। उन्होंने बताया कि संस्था द्वारा विगत 18 वर्षों से शिक्षक सम्मान की परंपरा के माध्यम से क्षेत्र के शिक्षकों को सम्मानित किया जाता रहा है।
उन्होंने कहा कि कोविड काल के बाद भले ही यह परंपरा अपने पूर्व स्वरूप में निरंतर नहीं रह सकी, लेकिन विद्यार्थियों द्वारा आज भी इस परंपरा को जीवित रखना संस्था के संस्कारों और समृद्ध परंपरा का परिचायक है।
शिवम शर्मा ने बदलते तकनीकी दौर में शिक्षक की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तकनीक शिक्षा का माध्यम हो सकती है, लेकिन विद्यार्थियों को सही दिशा देने, संस्कार देने और कर्तव्य-बोध विकसित करने में शिक्षक की भूमिका आज भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य, सहिष्णुता, जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों के योगदान पर भी विचार व्यक्त किए।
विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम का संचालन शिवांश चौरसिया एवं लोकेश साहू ने किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक एवं रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से शिक्षक दिवस की भावनाओं को अभिव्यक्त किया। कार्यक्रम में श्रीमती आरती मेहरा, सत्यवती विश्वकर्मा, प्रियांशी लोधी, कौशल्या कुर्मी, बुशरा खान, ऋतिका ठाकुर, कृष्णकांत लोधी, सुनील दुबे, संतोष तिवारी, माधव नेमा, शनि तिवारी, अंकिता राय, खुशबू मिश्रा, धर्मेंद्र लोधी, प्रियांशी जैन, ऋतु मिश्रा एवं रिया गुप्ता सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर महाविद्यालय के अन्य स्टाफ सदस्यों ने भी शिक्षक दिवस की महत्ता और शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक की भूमिका पर विचार साझा किए। कार्यक्रम में महाविद्यालय का समस्त स्टाफ एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
शिक्षक दिवस का यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस गुरु-शिष्य परंपरा की याद भी रहा, जिसमें शिक्षक ज्ञान के साथ संस्कार और जीवन की सही दिशा देने का कार्य करता है।


