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सागर में बैंक खातों के पीछे छिपा था सट्टे का नेटवर्क, पुलिस ने खोली परत-दर-परत कहानी

बेरोजगारों के दस्तावेजों से तैयार होती थीं फर्जी फर्में, बैंक खातों से घूमती थी संदिग्ध रकम; ₹2.69 करोड़ नकद और करीब ₹30 लाख का सोना बरामद

सागर। बैंक खाता खुलवाने के नाम पर शुरू हुआ खेल कथित तौर पर ऑनलाइन सट्टेबाजी के बड़े नेटवर्क तक जा पहुंचा। सागर की मकरोनिया थाना पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े एक संगठित नेटवर्क का खुलासा करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरोह बेरोजगार और सामान्य लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके दस्तावेज हासिल करता था। इन्हीं दस्तावेजों से फर्जी फर्में बनाकर बैंक खाते खुलवाए जाते और बाद में उनका इस्तेमाल संदिग्ध ऑनलाइन लेन-देन के लिए किया जाता था।

एक शिकायत से शुरू हुई पड़ताल

मामला तब सामने आया जब एक व्यक्ति ने पुलिस को शिकायत दी कि उसके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उसके नाम से फर्जी फर्म बनाई गई है। बैंक खाते की जांच में करीब छह महीने में लगभग 90 लाख रुपये के लेन-देन की जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने खाते से जुड़े लोगों, फर्मों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की कड़ियां जोड़ना शुरू किया।

दस्तावेज किसी के, बैंक खाता किसी के और संचालन किसी और का

जांच में पुलिस को ऐसे कई बैंक खातों की जानकारी मिली, जिनके वास्तविक खाताधारकों को कथित लेन-देन की पूरी जानकारी नहीं थी। पुलिस के अनुसार बेरोजगार लोगों को पैसों का लालच देकर उनके दस्तावेज लिए जाते थे और उन्हीं के नाम से फर्म व करंट अकाउंट तैयार किए जाते थे। बाद में इन खातों का संचालन नेटवर्क से जुड़े लोग करते थे।

जांच बढ़ी तो खुलते गए नए नाम

पुलिस ने धर्मेन्द्र नाहर और सोनू दांगी से पूछताछ के बाद नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंच बनाई। इसके बाद अमित विश्वकर्मा, विपिन गिरी, स्वर्णेन्द्र पांडे और रिषभ पटेल समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी बताई गई है।

नकदी ने खोली बड़े लेन-देन की तस्वीर

पुलिस के अनुसार रिषभ पटेल के कब्जे से ₹2 करोड़ 69 लाख 42 हजार 700 रुपये नकद, करीब ₹30 लाख का सोना, नोट गिनने की मशीन और महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए। जांच में ऑनलाइन बेटिंग के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और टेलीग्राम के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंच बनाने की बात भी सामने आई है।

30 से ज्यादा फर्जी फर्में जांच के घेरे में

अब तक पुलिस को 30 से अधिक फर्जी फर्मों से जुड़े बैंक खातों की जानकारी मिली है। इनमें कई ट्रेडिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, टूर एंड ट्रेवल्स और अन्य कारोबारों के नाम शामिल हैं। प्रारंभिक वित्तीय जांच में इनसे जुड़े खातों में ₹5.50 करोड़ से अधिक के ट्रांजेक्शन का पता चला है। पुलिस सभी खातों की गहन वित्तीय जांच कर रही है।

अब बैंक खाता खुलने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में

पुलिस की जांच सिर्फ आरोपियों तक सीमित नहीं है। फर्जी फर्मों के पंजीयन और बैंक खाते खुलवाने की प्रक्रिया में यदि किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका या लापरवाही सामने आती है तो उसकी भी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस की अपील—आसान कमाई का लालच पड़ सकता है भारी

सागर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कमीशन या आसान कमाई के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम, पासबुक, चेकबुक या बैंकिंग जानकारी किसी दूसरे को न दें। अपने नाम से खुला बैंक खाता यदि साइबर अपराध की रकम के लेन-देन में इस्तेमाल होता है तो खाताधारक भी जांच के घेरे में आ सकता है।