ब्रेकिंग न्यूज़

—Advertisement—

,

छाता थामे बाल गणेश की मनमोहक छवि, 13 साल से धरमपुरा में गूंज रही गणपति भक्ति

Author Picture
Published On: September 20, 2026

श्री वक्रतुंड बाल गणेश समिति का अनूठा आयोजन, धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजा 10 दिवसीय गणेश उत्सव

सागर। शहर के अंबेडकर वार्ड स्थित धरमपुरा क्षेत्र इन दिनों गणपति भक्ति से सराबोर है। यहां श्री वक्रतुंड बाल गणेश समिति द्वारा स्थापित भगवान गणेश की मनमोहक प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। इस वर्ष समिति ने छाता लगाए बाल गणेश की विशेष प्रतिमा और आकर्षक झांकी सजाई है, जो श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

धरमपुरा में गणेश उत्सव की यह परंपरा करीब 13 वर्षों से लगातार जारी है। हर वर्ष समिति द्वारा भगवान गणेश की प्रतिमा को अलग थीम और आकर्षक झांकी के साथ विराजित किया जाता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार भी गणेश उत्सव को भव्य स्वरूप दिया गया है।

प्रतिदिन क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आयोजन स्थल पर पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन कर पूजा-अर्चना एवं आरती में शामिल होकर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं। शाम के समय आयोजन स्थल पर विशेष धार्मिक वातावरण देखने को मिल रहा है।

समिति अध्यक्ष कार्तिक जाट ने बताया कि पिछले करीब 13 वर्षों से समिति द्वारा गणेश उत्सव को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। प्रत्येक वर्ष गणेश प्रतिमा के साथ नई थीम पर झांकी तैयार की जाती है, ताकि श्रद्धालुओं के साथ बच्चों और युवाओं को भी धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों से जोड़ा जा सके।

उन्होंने बताया कि 10 दिवसीय गणेश उत्सव के दौरान धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। इनमें रामायण पाठ, सुंदरकांड पाठ, बच्चों की खेल प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य प्रतियोगिता, महाआरती, छप्पन भोग और विशाल भंडारे सहित विभिन्न आयोजन शामिल हैं।

गणेश उत्सव के दौरान समिति के सदस्यों द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा और कार्यक्रमों की व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आयोजन स्थल पर प्रतिदिन श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच समिति के सदस्य व्यवस्थाओं को संभालने में जुटे हुए हैं।

धरमपुरा में सजे छाता वाले बाल गणेश की आकर्षक झांकी के साथ 13 वर्षों से चली आ रही यह धार्मिक परंपरा क्षेत्र में भक्ति, आस्था और सामाजिक एकजुटता का वातावरण बना रही है।