सांदीपनि विद्यालय में सेवा संकल्प अभियान के तहत सजा सांस्कृतिक मंच, अभिराज सिंह ने भारतीय परंपराओं के महत्व को बताया; विधायक बृजबिहारी पटेरिया ने बच्चों को रामायण पढ़ने के लिए किया प्रेरित
देवरीकलाँ। भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत, श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य ज्ञान और लोक परंपराओं की जीवंत छटा उस समय एक मंच पर नजर आई, जब सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शासकीय सांदीपनि विद्यालय देवरी में गीता ज्ञान पर आधारित लोक नृत्य नाटिका एवं पारंपरिक मोनिया नृत्य का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लोक कलाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान और जीवन मूल्यों का संदेश दिया गया। दिव्यांग लोक कलाकारों की आकर्षक प्रस्तुतियों ने उपस्थित अतिथियों, विद्यार्थियों और नागरिकों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। आयोजन में मुख्य अतिथि अभिराज सिंह, क्षेत्रीय विधायक बृजबिहारी पटेरिया, जिला पंचायत उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह सहित अन्य अतिथियों की उपस्थिति रही।
संस्कृति से जुड़कर समृद्ध होता है ज्ञान : अभिराज सिंह
मुख्य अतिथि अभिराज सिंह ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति की प्राचीनता और उसकी वैश्विक पहचान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारे देश का इतिहास अद्भुत और गौरवशाली है। हजारों वर्षों से चली आ रही सांस्कृतिक परंपराएं केवल हमारी विरासत नहीं, बल्कि विश्व को दिशा देने वाली ज्ञान परंपरा का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों को समझने का अवसर देते हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों का ज्ञान बढ़ता है और वे अपनी जड़ों से जुड़ते हैं। भारतीय परंपराओं को जानना और उन्हें आत्मसात करना समाज के लिए महत्वपूर्ण है।
बच्चों के बैग में किताब-पेंसिल के साथ रामायण भी रखें : विधायक
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे क्षेत्रीय विधायक बृजबिहारी पटेरिया ने परिवार और बच्चों के संस्कारों में धार्मिक ग्रंथों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि माता-बहनों के ऊपर घर-परिवार की बड़ी जिम्मेदारी होती है। घरेलू कार्यों से लेकर पशुओं की देखभाल, बच्चों का पालन-पोषण और रिश्तेदारों की सेवा तक वे अनेक दायित्व निभाती हैं।
विधायक ने अभिभावकों से आग्रह करते हुए कहा कि जब भी बच्चे स्कूल जाएं, उनके बैग में किताबों और पेंसिल के साथ रामायण की एक छोटी-सी पुस्तक भी अवश्य रखें। उन्होंने कहा कि बच्चों को बचपन से ही रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथों से परिचित कराने से उनमें संस्कार, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के प्रति समझ विकसित करने में मदद मिल सकती है।
दिव्यांग कलाकारों ने लोककला के माध्यम से दिया गीता ज्ञान का संदेश
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण उमेश कुमार वैद्य एवं उनके साथी दिव्यांग लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत गीता ज्ञान पर आधारित लोक नृत्य नाटिका और पारंपरिक मोनिया नृत्य रहा। कलाकारों ने अपनी कला, भाव-भंगिमाओं और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान एवं लोक संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की।
मंच पर लोक परंपराओं और धार्मिक संदेशों का अनूठा संगम देखने को मिला। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भारतीय संस्कृति की विविधता और लोक कलाओं की महत्ता से परिचित कराया। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने और उसका सम्मान करने की प्रेरणा दी।
जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों की रही सहभागिता
इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह, अनिल ढिमोले, डॉ. बलदेव सिंह लोधी, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह लोधी, सुधीर बजाज, बद्री कुर्मी, देवेंद्र खरे, मनोहर गुप्ता, राजाराम पटेल, संजय चौरसिया, राघवेंद्र सिंह, विकासखंड शिक्षा अधिकारी तथा विद्यालय के प्राचार्य सुनील बड़ेरिया सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षक-शिक्षिकाओं और स्थानीय नागरिकों ने सहभागिता की। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम ने भारतीय ज्ञान परंपरा, लोककला और संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया।


