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बारिश की मार से ‘पीला सोना’ बेहाल, पीला मोजैक का कहर; सोयाबीन में दाने नहीं आने से किसानों की बढ़ी चिंता

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Published On: September 16, 2026

किसानों का दावा—पीला मोजैक रोग और लगातार बारिश से फसल प्रभावित, सर्वे कर मुआवजे की मांग

गौरझामर: गिरीश शर्मा 

लगातार बारिश क बीच अब सोयाबीन और उड़द की फसल को लेकर किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। किसानों का कहना है कि कई खेतों में सोयाबीन की फसल पीला मोजैक रोग से प्रभावित हुई है, जबकि लगातार बारिश के कारण सोयाबीन और उड़द की फसल को भी नुकसान पहुंचने की स्थिति बनी है। कुछ किसानों के अनुसार फलियों में दाने विकसित नहीं हो रहे हैं और कई जगह पौधे सूखने लगे हैं।किसानों से प्राप्त जानकारी के अनुसार गोवर्धन एवं राजस्व मंडल गौरझामर क्षेत्र के गौरझामर, सुजानपुर, मढ़ी जमुनिया, खामखेड़ा, सालाबारा, सोनपुर, चारगुवां, बिजोरा, सरखेड़ा, जैतपुर कछिया और बरकोटी सहित आसपास के गांवों में फसलों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। किसानों का दावा है कि कुछ स्थानों पर सोयाबीन और उड़द की फसल को काफी नुकसान हुआ है, जबकि कुछ खेतों में फसल पूरी तरह प्रभावित होने की स्थिति बताई जा रही है। फलियों में दाने नहीं, पौधे सूखने की शिकायत

जैतपुर कछिया के किसान मनोज विश्वकर्मा ने बताया कि सोयाबीन की फसल में रोग के कारण फलियों में दाने नहीं आ रहे हैं और पौधे सूख रहे हैं। वहीं खामखेड़ा के किसान रविशंकर गुरु ने बताया कि पीला मोजैक रोग के कारण उनके क्षेत्र में सोयाबीन की फसल को नुकसान पहुंचा है।

किसानों का कहना है कि पहले से ही खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बारिश और फसल में रोग के कारण उत्पादन प्रभावित होने की आशंका से किसानों के सामने आर्थिक संकट की चिंता बढ़ गई है।

सर्वे कर उचित मुआवजा देने की मांग

किसानों ने शासन-प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में फसल का सर्वे कराकर वास्तविक नुकसान का आकलन कराने और नियमानुसार राहत एवं मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि समय पर सर्वे होने से प्रभावित किसानों को नुकसान की वास्तविक स्थिति दर्ज कराने में मदद मिलेगी।

कांग्रेस नेता रीतेश गुरु ने कहा कि प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण किसानों की फसल प्रभावित हुई है। उन्होंने शासन-प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे कराकर किसानों को उचित राहत एवं मुआवजा दिलाने की मांग की है।

अब किसानों की नजर प्रशासन की ओर है कि प्रभावित गांवों में फसलों का सर्वे कब शुरू होता है और नुकसान के आकलन के बाद किसानों को किस प्रकार की राहत मिलती है।