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जमीन अपनी नहीं थी, लेकिन हौसला अपना था… अश्वगंधा ने बदल दी तस्वीर,कमाया लाखों का मुनाफा

अश्वगंधा ने बदली किसान की तकदीर, ठेके की जमीन पर कमाल

इंजीनियर बेटे की सलाह, पिता ने बदली खेती की दिशा

दमोह। खेती में मेहनत करने के बावजूद जब आमदनी उम्मीद के मुताबिक न हो, तो किसान के सामने रास्ता बदलने की चुनौती होती है। दमोह जिले के भाटखमरिया गांव के किसान अरविंद सिंह लोधी के लिए भी कुछ ऐसा ही था। वर्षों तक सोयाबीन, गेहूं और चने की पारंपरिक खेती की, लेकिन मौसम और बाजार की चुनौतियों के बीच आमदनी सीमित रही।

 

फिर उनके इंजीनियर बेटे ओम लोधी ने खेती को नए नजरिए से देखने की पहल की। उन्होंने पारंपरिक फसलों से अलग औषधीय फसल अश्वगंधा की खेती का सुझाव दिया।

सबसे बड़ी चुनौती थी जमीन की। खुद की जमीन नहीं थी, लेकिन हौसला कम नहीं हुआ। ओम लोधी ने 12 एकड़ जमीन ठेके पर ली और पिता के साथ मिलकर अश्वगंधा की खेती शुरू कर दी।

वैज्ञानिक सोच और बाजार की रणनीति

 

खेती में सिर्फ उत्पादन पर नहीं, बल्कि लागत और बाजार पर भी फोकस किया गया। वैज्ञानिक तरीके से फसल तैयार की गई और कम लागत में बेहतर उत्पादन का लक्ष्य रखा गया। साथ ही सीधे बल्क बायर से जुड़ने की रणनीति अपनाई गई।

खास बात यह रही कि कमाई का रास्ता सिर्फ अश्वगंधा की जड़ तक सीमित नहीं रखा गया। बीज, पत्ती और तने से भी अतिरिक्त आय हासिल की गई।

आंकड़ों ने बदली तस्वीर

बताया गया कि अश्वगंधा की खेती में प्रति एकड़ करीब 16,500 रुपये की लागत आई। सूखी जड़ का उत्पादन लगभग 4 से 6 क्विंटल प्रति एकड़ रहा और बिक्री दर करीब 350 से 450 रुपये प्रति किलो तक रही।

इससे प्रति एकड़ कुल आय 2.3 लाख रुपये से अधिक और शुद्ध लाभ 2 लाख रुपये से ज्यादा बताया गया। इसके अलावा बीज, पत्ती और तने की बिक्री से अतिरिक्त आमदनी भी हुई।

खेती में बदलाव की मिसाल

अरविंद सिंह लोधी की यह कहानी सिर्फ एक किसान की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि यह बताती है कि खेती में नई सोच, सही तकनीक और बाजार की समझ किस तरह बदलाव ला सकती है।

खास बात यह है कि यह प्रयोग अपनी जमीन पर नहीं, बल्कि ठेके की 12 एकड़ जमीन पर किया गया। यानी संसाधन सीमित होने के बावजूद बेहतर योजना और मेहनत से खेती को लाभ का जरिया बनाया जा सकता है।

ओम लोधी जैसे युवाओं का खेती से जुड़ना और नई तकनीक व बाजार की जानकारी किसानों तक पहुंचाना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

संदेश साफ है—खेती सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि संभावनाओं से भरा व्यवसाय भी है। सही फसल का चुनाव, वैज्ञानिक तरीका और बाजार की समझ किसान की मेहनत को बेहतर आमदनी में बदल सकती है। अरविंद सिंह लोधी और उनके बेटे ओम लोधी की अश्वगंधा की खेती इसी बदलाव की एक प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है